पुण्यसलिला भगवती भागीरथी श्रीगंगाजीके तटपर, उत्तराखण्डकी भूमिपर स्थित, गीताभवनमें प्रतिवर्ष ग्रीष्म-ऋतुमें सत्संगका आयोजन होता है। इसके संस्थापक ब्रह्मलीन परम श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दका प्रतिवर्ष लगभग 4 माह सत्संग स्वयं करवाते थे। यहाँपर 1000 से अधिक कमरे हैं, जिसमें साधकोंके लिये निःशुल्क आवास आदिकी व्यवस्था है। साधकगण भगवत्प्राप्ति-हेतु भजन-साधन, सत्संग, गंगास्नान, कीर्तन, गीता-रामायण पाठ आदि करनेके लिये बड़ी संख्यामें यहाँ आते व ठहरते हैं। कार्यक्रमके दिनोंमें, प्रसाद पानेके लिये नित्य भोजनालय चलता है। सत्संग-भवन एवं कमरों आदिकी दीवालोंपर अनेक संतों एवं भक्त-कवियोंकी वाणियाँ अंकित करायी गयी हैं और सम्पूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता संगमरमरके पत्थरोंपर अंकित है ।

यहाँके गीताभवन औषधालयमें शुद्ध आयुर्वेदिक औषधियोंका निर्माण शास्त्रोक्त पद्धतिसे गंगा-जल एवं हिमालयकी जड़ी-बूटियोंसे अनुभवी वैद्योंके संरक्षणमें किया जाता है। निजी दूकानोंमें गीताप्रेसकी पुस्तकें, वस्त्र, औषधियाँ, प्रसाद बनानेकी सामग्री, मिठाइयाँ आदि प्राप्त होती हैं ।

गीता-भवनके पास स्थित वट-वृक्षका विशेष महत्त्व है। कभी यह स्थान स्वामी श्रीरामतीर्थ-जैसे अनेक संत-महापुरुषोंका तपस्थल रहा है। आज भी यहाँके आसपास वनमें साधन-भजनके लिये मनोरम स्थान है। गीताभवन नं० 1 और 3 के सामने विशाल तथा रमणीय पक्के घाट बने हैं, जहाँ बैठकर लोग माँ गंगाके सुरम्य स्वरूपके दर्शनके साथ स्नान-लाभका पुण्य प्राप्त करते हैं ।

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व्यवस्थापक
गीताभवन
स्वर्गाश्रम
ऋषिकेश – 249304 (उत्तरांचल)
भारत
फोन : +91-135-2430122, 2432792